खाना खजाना!

5000 वर्ष लंबे भारतीय इतिहास में धर्म, व्यवसाय और घुसपैठ का प्रभाव यहाँ के खानपान पर बहुत अधिक रहा है, और इसका उदाहरण आधुनिक भारत में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के स्वाद और खाना पकाने की प्रांतीय शैलियां है। युगों-युगों से, भारत में अनेक खोजकर्ता आए, और अपने साथ खाना पकाने के नए-नए तरीके और वस्तुएं लाए जैसे कि चाय, स्वाद, मिट्टी में उगने वाले विविध उत्पाद। भारत के लोकप्रिय व्यंजनों में इनके इस्तेमाल ने उन व्यंजनों के स्वाद को बदल कर उन्हें अधिक स्वादिष्ट बनाया, जिसके चलते भारतीय बावर्चियों ने कुशलता पूर्वक इनका इस्तेमाल करते हुए नए-नए पकवान ठीक उसी तरह से तैयार किए जैसे कोई शिल्पकार अपने पैलेट के रंगों का इस्तेमाल करता है। इस जिंदादिल भूमि के विभिन्न पकवानों की जानकारी लेने के लिए आपको यहाँ की यात्रा करनी चाहिए।

भारत के भीतर

Bengali-cuisine-Kolkata

पश्चिम बंगाल

कोलकाता, पश्चिम बंगाल का बंगाली भोजन

यात्रा का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर-मार्च

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यदि आप मीठे और तीखे स्वाद के बढ़िया मिश्रण को खाने के लिए तरस रहे हैं, तो कोलकाता की गलियों में जाएं जहाँ का हर व्यंजन अलग और रोमांच पैदा करने वाला होगा। आपको पता होना चाहिए कि कोलकाता में खाए जाने वाले पारंपरिक बंगाली खाने में, सदियों से भारत के अन्य भोजन के समान, सदियों से उपमहाद्वीप में मौजूद अनेक प्रकार के प्रभाव वाली सामग्रियों, स्वाद, और शैलियों का प्रभाव रहा है - ऐसा शेष दुनिया के साथ भारत के विस्तृत व्यावसायिक संबंधों के कारण संभव हुआ है। स्वयं को आत्मसात और संशोधित कर, आज कोलकाता के भोजन में खाने की एक ऐसी विरासत समा गई है जो कि स्वाद में अनूठी, रोमांचक, समृद्ध और परिष्कृत है। अपनी उल्लेखनीय रूप से सामान्य सामग्रियों और असामान्य सीज़निंग दोनों के परिष्कृत तालमेल और मिश्रण से साधारण भोजन भी असाधारण व्यंजन में बदल जाता है, और आपको मिलता है खाने का उत्कृष्ट अनुभव। ठेठ बंगाली भोजन का लुत्फ़ उठाएं जिसमें तीखे से लेकर मीठे स्वाद की वस्तुएं ही नहीं बल्कि स्वादिष्ट, हल्के स्वाद से लेकर मसालेदार वस्तुएं भी शामिल होती हैं, जिससे कि आप हर प्रकार के स्वाद का अनुभव कर सकते हैं। अपने खाने की शुरुआत घी, नमक, खुशबूदार हरे नींबू के टुकड़ों, और हरी मिर्च के साथ परोसे गए गरमागरम चावलों के साथ करें। सबसे पहले सब्जियां आती हैं, मुख्य रूप से कड़वी; उनके बाद दाल, शायद उबली हुई सब्जियां या तली हुई मछली और सब्जियां या उनके पकौड़े। इसके बाद किसी भी सब्जी का व्यंजन जैसे कि दलना या घंटों या चछरी, उसके बाद हल्की मसालेदार मछली झोल (ग्रेवी) और फिर मछली के अन्य मसालेदार व्यंजन। मंग्शो (मीट-मटन या मटन या चिकन) के बाद हमेशा मछली की बारी आती है। इसके बाद स्वादिष्ट तीखी मीठी-खट्टी चटनियों का नंबर आता है जिनका स्वाद आपको खूब भाएगा, और आपका मन मिठाई खाने को करेगा। चटनी को पापड़ के साथ परोसा जाता है। मीठे में मिष्टी-दोई (मीठी दही) या पयेश या आम जैसे फलों के साथ सूखी मिठाई खाई जा सकती है। कोलकाता जैसे आकर्षक शहर (जिसे संयोग से 'खुशियों का शहर' कहा जाता है) को अपने सड़क किनारे के भोजन की प्रमाणिकता पर गर्व है। यहाँ बदलाव देखा जा सकता है लेकिन यह इत्मीनान से, धीमी गति से होता है। कोलकाता बीते युग के इतिहास, इसकी अविस्मरणीय औपनिवेशिक विरासत, और सदियों से अपनी अनूठी पहचान को संभालने और अपने भोजन का आनंद लेने वाले भूले-बिसरे समुदायों के स्वाद की यादों से भरा हुआ है। कोलकाता वासी व्यावहारिक होते हैं, और क्योंकि यहाँ लगभग हर समाज का व्यक्ति सड़क किनारे का खाना पसंद करता है इसलिए भोजन एक ऐसी चीज़ है जब व्यक्ति की जाति-धर्म की परवाह नहीं की जाती है।

Punjabi-cuisine-Amritsar

पंजाब

अमृतसर, पंजाब का पंजाबी भोजन

यात्रा का सबसे अच्छा समय: नवंबर और मार्च

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अधिकतर पंजाबी लोगों की ज़िंदगी का फलसफा है खाना, पीना और खुश रहना। उन्हें अपने खाने से बहुत प्यार होता है और अपने व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने के लिए वे उसमें काफी मात्रा में घी, मक्खन और क्रीम का इस्तेमाल करते हैं। इसी प्रकार से पंजाबी भोजन बनाने में प्याज, अदरक और लहसुन का बहुत इस्तेमाल किया जाता है जिससे कि उसके पोषक तत्वों को बेहतर बनाया जा सके। एक पारंपरिक पंजाबी थाली में अलग-अलग प्रकार की रोटियां पाई जाती हैं; कुछ को अवन में गर्म किया जाता है, उदाहरण के लिए, भुनी हुई रोटी, लच्छा परांठा, नान और कुलचा, जबकि अन्य को तवे पर सूखा ही तैयार किया जाता है जैसे कि चपाती और ज्वार (सोरघम) की रोटी, मक्की की रोटी। एक अन्य प्रकार की रोटी होती है रुमाली रोटी, या, दूसरे शब्दों में, साधारण रोटी से बड़ी रोटी जिसे आसानी से खाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, ऐसी भी रोटियां हैं जिन्हें तेज़ आंच पर कम तेल में तला जाता है, उदाहरण के लिए, परांठा और अधिक तेल में तला जाता है, उदाहरण के लिए, पूड़ी और भटूरा। पंजाब, अमृतसर केवल स्वर्ण मंदिर के लिए ही नहीं जाना जाता है बल्कि खाने के शौकीनों के लिए यह स्थान स्वर्ग है। पवित्र लंगर (स्वर्ण मंदिर में सामूहिक रात्रि भोजन) से लेकर शहर के हर कोने और नुक्कड़ में स्थित ढाबों तक, अमृतसर का खाना वहाँ रहने वालों जितना ही जिंदादिल है। इस शहर का खाना केवल मांसाहारी लोगों की पसंद के अनुसार ही नहीं तैयार किया जाता बल्कि शाकाहारी खाना पसंद करने वाले लोगों को भी उनकी पसंद का खाना मिल जाता है। मुंह में पानी भर देने वाले अमृतसरी कुलचे, पिंडी छोले, मा-की-दाल, अमृतसरी अंगले, कीमा, पिन्नी (पीसी हुई उड़द दाल, सूजी में पीसे सूखे मावे से निर्मित मिठाई), लस्सी (दही से निर्मित तरोताज़ा करने वाला पेय) खाने पीने की उन अनेक चीज़ों में से कुछ हैं जिनका मज़ा आप इस शहर में ले सकते हैं।

Parsi-cuisine-Mumbai

महाराष्ट्र

मुंबई, महाराष्ट्र का पारसी भोजन

यात्रा का सबसे अच्छा समय: नवंबर से फरवरी

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मुंबई के भव्य पुराने ईरानी कैफे एक लंबे समय से शहर के अविश्वसनीय रूप से भिन्न भोजन और विश्ववादी, मिलनसार संस्कृति का कीमती प्रतीक रहे हैं। सबसे पहले ईरानी कैफे उन पारसियों द्वारा 19वीं सदी में खोले गए - जो ईरान से यहाँ भारत में आ कर बस गए थे। अधिकतर कैफे परिवारों द्वारा चलाए जाते हैं और सस्ते पारसी भोजन के लिए लोकप्रिय हैं। कई मायनों में पारसी भोजन मुंबई की आत्मा है और मुंबई के वेतन भोगी वर्ग की पसंद है। किसी भी सच्चे मुंबईवासी को मुंबई से जुड़े मेलजोल के यह स्थान भावुक बनाते हैं - अपनी पसंद के ईरानी कैफे में जाना, ऊंची छतों, दीवारों पर विशाल कांच के दर्पण, बेंटवुड कुर्सियों, और संगमरमर टॉप वाली मेजों के घर जैसे आराम में घंटों समय बिताना, प्रसिद्ध मावा केक, बन मस्का और ईरानी चाय, मटन समोसा, कीमा पाव, अकूरी, बेरी पुलाव, वेजिटेबल पफ को स्वाद ले कर खाना - पुराने समय की याद दिलाते हैं पिछले 1300 वर्षों के दौरान, पारसी भोजन भारत के पश्चिमी तट का एक अनूठा और पसंदीदा भोजन बन गया है जिसमें प्राचीन फ़ारस के भोजन के भरपूर स्वाद और तकनीक आज भी कायम हैं। फ़ारसी भोजन से अलग इसने अपनी एक पहचान बनाई है, और शानदार नए व्यंजनों के निर्माण के लिए पारंपरिक व्यंजनों में स्थानीय सामग्रियों और मसलों का इस्तेमाल किया जाता है। आज, शांति पसंद पारसी अच्छे भोजन के दीवाने हैं और दावतों में भोजन पकाने के लिए घंटों समय व्यतीत करते हैं। आधुनिक पारसी भोजन में पश्चिमी प्रभाव, गुजरातियों का मीठे और खट्टे के लिए प्यार, और खुबानी जैसे सूखे मेवों के साथ मांस को मिलाने की फ़ारसी प्रतिभा का स्वादिष्ट मिश्रण देखने को मिलता है। इसलिए पारंपरिक पारसी भोजन खाना जैसे अपनी प्लेट में इतिहास के एक टुकड़े को खाने जैसा होता है। लेकिन वह क्या चीज़ है जो पारसी भोजन को सामान्य भारतीय भोजन से अलग बनाती है? एक कारण है, सिरके और चीनी/गुड़ के भरपूर इस्तेमाल की बदौलत भोजन का मीठा-खट्टा स्वाद।

Chettinad-cuisine-Chennai

तमिलनाडु

चेन्नई, तमिलनाडु का चेट्टिनाड भोजन

यात्रा का सबसे अच्छा समय: नवंबर से फरवरी

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तमिलनाडु के चेट्टिनाड क्षेत्र में चेट्टियार समुदाय के लोग मुख्य रूप से रहते हैं जिनमें अधिकतर लोग बैंकर, व्यापारी और व्यवसायी हैं। इस सूखे, शुष्क और गर्म क्षेत्र से प्रभावित चेट्टिनाड भोजन मूल रूप से मसालेदार होता है, और भोजन में पकी हुई दाल, अवियल, ड्रमस्टिक सांभर और चावल को स्वादिष्ट बनाने के लिए घी का इस्तेमाल किया जाता है। बहुत ही हल्के, रेशेदार अप्पम, इडली, इदियप्पम, अदाई और डोसे से लेकर अनेक प्रकार का सीफूड जैसे कि तली हुई मछली, करी फिश, केकड़े, लॉबस्टर और ताज़े झींगे तक, चेट्टिनाड भोजन हर प्रकार से मज़ेदार, स्वादिष्ट और रुचिकर होता है। चेट्टिनाड भोजन में जीरे, मेथी, सौंफ, लौंग, तेज़ पत्ते, हल्दी और इमली सहित ताज़ा पीसे हुए मसालों की अलग सी खुशबू आती है। मांस, सीफूड, सब्जियों, अनाज और किण्वित चावल का इस्तेमाल नियमित रूप से किया जाता है। इस भोजन की एक अनूठी विशेषता है धूप में सुखाई गई सब्जियों और यहाँ तक की मांस का इस्तेमाल। यह तकनीक भोजन के पोषक मूल्य को बढ़ाने के लिए जानी जाती है। चेट्टिनाड भोजन आचार के लिए भी मशहूर है और पायसम भी जो कि एक प्रसिद्ध तरल मिठाई होती है जिसे दूध में बादाम-अखरोट के साथ फ्लेवर किया जाता है।

Kashmiri-cuisine-Jammu

जम्मू-कश्मीर

जम्मू, जम्मू-कश्मीर का कश्मीरी भोजन

यात्रा का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर-मार्च

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कश्मीर का भोजन वाकई अनूठा और अतुलनीय है। स्वाद में उत्तम और लज्ज़त में अनूठा और शानदार खुशबू वाला कश्मीरी भोजन आकर्षक होता है, जिसे खाने का बारबार मन करता है। कश्मीरी थाली में मुख्य रूप से मांसाहारी व्यंजन शामिल होते हैं। हालाँकि, कुछ बहुत ही स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजन भी पाए जाते हैं, जिन्हें सभी खूब चाव से खाते हैं। प्रसिद्ध 'वाज़वान' जिसमें एक थाली में अनेक व्यंजन शामिल होते हैं, उसमें सूखे मावों के इस्तेमाल से तैयार व्यंजन, खासतौर पर करी बनाने में, भी शामिल होते हैं। कश्मीरी चावल भी बहुत खुशबूदार और हल्का होता है, और इस प्रकार से कश्मीरी राइस पुलाव भी लोग बहुत पसंद करते हैं।

Rajasthani-cuisine-Jaipur

राजस्थान

जयपुर, राजस्थान का राजस्थानी भोजन

यात्रा का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च

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राजस्थान का भोजन मुख्य रूप से शाकाहारी खाना पसंद करने वालों के लिए होता है और इसमें मुंह में पानी भर देने वाले तरह-तरह के शानदार व्यंजन बनाए जाते हैं। अन्य भारतीय व्यंजन शैलियों की तुलना में मसालों का इस्तेमाल बहुत अधिक किया जाता है, तब भी इनके भोजन का स्वाद उतना ही अच्छा होता है। राजस्थानी लोग अपने अधिकतर व्यंजनों को पकाने में घी का इस्तेमाल अधिक करते हैं। राजस्थानी भोजन अपनी मसालेदार करी और स्वादिष्ट मिठाइयों के लिए लोकप्रिय है। संगरी जैसे स्थानीय पौधों से प्राप्त सूखी दाल और सेम का इस्तेमाल मुख्य रूप से राजस्थानी व्यंजनों को तैयार करने में किया जाता है। बेसन का इस्तेमाल भी कुछ एक व्यंजनों में आमतौर पर किया जाता है, उदाहरण के लिए, पकोड़ी और गट्टे की सब्जी। पीसी हुई दालों का इस्तेमाल पापड़ बनाने में खूब किया जाता है। राजस्थानी लोगों को चटनियों से बहुत प्यार होता है, जिन्हें अलग-अलग स्वादों का इस्तेमाल करते हुए तैयार किया जाता है, उदाहरण के लिए, धनिया, हल्दी, लहसुन और पुदीना। राजस्थान के अनेक व्यंजनों में से, दाल बाटी चूरमा शायद सबसे लोकप्रिय है। ऐसे लोग जिन्हें तरह-तरह के व्यंजन खाने का शौक हो, राजस्थान में उन्हें अनेक प्रकार के व्यंजन मिल जाएंगे। राज्य के एक हिस्से से अगले में यात्रा करने के दौरान, आप देखेंगे कि हर इलाके की कोई न कोई खासियत है, जो वहाँ के खाने में भी दिखाई देती है। हर जिले की अपनी एक मुख्य मिठाई है, उदाहरण के लिए, जोधपुर की मावा कचोड़ी, बीकानेर के रसगुल्ले, जयपुर का घेवर, पुष्कर के मालपुए, आदि।

विदेश की सैर

Nepalese-cuisine-Kathmandu

नेपाल

नेपाली व्यंजन, काठमांडू

यात्रा का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर और नवंबर

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कोई भी गंतव्य तब तक पूरा नहीं होता जब तक कि आप वहाँ का स्थानीय भोजन, स्वाद और विभिन्न किस्में नहीं आज़माते। काठमांडू इससे कोई अलग नहीं है। यहाँ आपको अनेक प्रकार के स्थानीय भोजन मिल जाएंगे जिन्हें अवश्य आज़माना चाहिए और जो यहाँ की यात्रा को और सार्थक बनाते हैं। काठमांडू के सड़क किनारे के खाने में आपको हर प्रकार का स्वाद मिल जाएगा। इस शानदार गंतव्य का भोजन उतना लोकप्रिय नहीं है, लेकिन यहाँ आपको अनेक किस्म का खाना मिलेगा। यहाँ का भोजन केवल मोमो और थुपका तक ही सीमित नहीं है, और यहाँ इतनी प्रकार की किस्में मौजूद हैं कि आप दुविधा में पड़ जाएंगे कि क्या छोड़ें और क्या आज़माएं।। काठमांडू का भोजन स्वाद, परंपरा और लज़ीज़ खाने का एक मिश्रण है। यदि आपको किसी नेपाली के घर में जाने का मौका मिला, तो आपको हर अवसर के लिए व्यंजन मिल जाएगा। सबसे लोकप्रिय स्थानीय व्यंजन जिसके परिचय की कोई आवश्यकता नहीं है वह है मोमो। सड़क पर मिलने के अलावा, यह देश का मुख्य भोजन है जिसे काठमांडू के हर घर में खाया जाता है। इसके साथ खाई जाने वाली तीखी लाल मिर्च वाली चटनी स्वाद को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा देती है। अन्य शानदार व्यंजन भी हैं जैसे कि सेल रोटी, एक पारंपरिक घर की बनी, मीठी, अंगूठी के आकार वाली चावल की रोटी, अंडे वाली बारा, हल्की और स्पंजी काली दाल वाली पैटी जिसके ऊपर एक अंडा रखा जाता है और साइड में टमाटर की चटनी, पानी रोटी, आदि। सेकुवा नेपाली शैली की बार्बेक्यू होती है जो सड़क किनारे मिलने वाला एक अन्य लोकप्रिय व्यंजन है। वैसे तो गौमांस को सबसे अधिक पसंद किया जाता है, कभी-कभी आपको सूअर का स्वादिष्ट मांस बेचते फेरी वाले भी मिल जाएंगे। इन भुने हुए प्रोटीन के टुकड़ों को कोयले पर जलाया जाता है और हर जगह उपलब्ध टमाटर के आचार और लाल मिर्च वाली सॉस के साथ बड़े-बड़े टुकड़ों में परोसा जाता है।

वैसे तो हमने आपको यह सभी सुझाव दे दिए हैं, फिर भी IndiGo के पास अभी बहुत सारे गंतव्य मौजूद हैं जिनकी खोज अवश्य की जानी चाहिए। यह तो बस एक नमूना है, हम से संपर्क करें और वायदा करते हैं कि हमारे साथ आपकी अगली यात्रा पर हम वहाँ उपलब्ध स्वादिष्ट व्यंजनों की जानकारी देंगे। आपकी यात्रा शुभ हो!

 

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